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महाकुंभ जैसे धार्मिक आयोजन में वैसे तो श्रद्धालु भाग लेने के लिए आतुर रहते हैं लेकिन इस बार यहां धार्मिक नारों की जयकार ही नहीं बल्कि हिंदुत्व की राजनीती का शोर भी सुनने को मिला.
जहां एक ओर विश्व हिन्दू परिषद् द्वारा संचालित शिविर में मंदिरों को सरकारी अधिग्रहण से मुक्त कराने पर बल दिया गया. वहीं, दूसरी तरफ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा संचालित धर्म संसद में गौमाता के संरक्षण पर ज़ोर दिया गया.
मुस्लिम दुकानदारों के मेला परिसर में घुसने पर प्रतिबंध है. लेकिन उन्हीं के खिलाफ नफरती भाषण देने वाले हिंदुत्व ‘ब्रांड’ के नेता जैसे कि साध्वी ऋतंभरा और यति नरसिंहानंद को महाकुंभ में न सिर्फ शिरकत करने को मिली बल्कि समय-समय पर भाषणों के लिए मंच भी मिला.
इन सबके बीच योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा प्रायोजित इस मेले में क्या करोड़ों श्रद्धालुओं के जरिए किसी खास तरह का राजनीतिक संदेश था या कोई राजनीतिक हित साधने का लक्ष्य था?
जानने के लिए देखिए आकांक्षा कुमार की ये रिपोर्ट.
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